ईसबगोल के पाँच तरह के विशिष्ट योग, बिल्कुल नई जानकारी
ईसबगोल के पाँच तरह के विशिष्ट योग, बिल्कुल नई जानकारी
ईसबगोल के पाँच तरह के विशिष्ट योग, बिल्कुल नई जानकारी

हम लोग सामान्यतः ईसबगोल को कब्ज़ और अतिसार रोग की दवा के रूप में प्रयोग करने तक ही सीमित रहते हैं । लेकिन सत्य यह है कि ईसबगोल का दायरा उससे बहुत बड़ा है । प्रस्तुत लेख में प्रकाशित आयुर्वेद क्लीनिक, मेरठ के सौजन्य से हम आपको ईसबगोल के पाँच तरह के विशिष्ट योगों के बारे में बता रहे हैं । रोचक जानकारी है, जरूर पढ़ियेगा ।
1 :- ईसबगोल का चूर्ण :-
100 ग्राम ईसबगोल लेकर उसमें 50 ग्राम छोटी इलायची का चूर्ण और 50 ग्राम धनिये के बीजों का चूर्ण मिलाकर साफ काँच की एयरटाईट शीशी में भर लें । इस चूर्ण को रोज दो बार 3-3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने बुखार से लगने वाले दस्त, पुराने दस्त, पित्त के बढ़ने से लगने वाले उल्टी और दस्त, खूनी बवासीर, और पेट के भारीपन आदि रोगों में लाभ होता है । रोग की तीव्रता के अनुसार 7 दिन से लेकर 28 दिन तक इस चूर्ण का सेवन किया जाता है ।
2 :- ईसबगोल की पेया :-
पेया अर्थात पीने की एक तरह की दवा । ईसबगोल की पेया बनाने के लिये 20 ग्राम ईसबगोल के चूर्ण को 200 ग्राम जल में घोलकर रातभर के लिये रख दिया जाता है । सुबह को इस पानी में 10 ग्राम देशी खाण्ड मिलाकर खूब अच्छी तरह से घोलकर खाली पेट पिया जाता है । इस पेया को पीने से नाक-मुँह-गुदा के रास्ते से गरमी के कारण आने वाला खून, सिर की गरमी, पित्ती आदि रोगों में लाभ मिलता है । इस पेया को 28-40 दिन तक लगातार सेवन किया जाता है ।
3 :- ईसबगोल का शरबत :-
ईसबगोल का शरबत बनाने के लिये 200 ग्राम ईसबगोल को 2 लीटर पानी के साथ पकावें । जब पानी 400 मिलीलीटर बाकि रहे तो इसमें 100 ग्राम शक्कर मिलाकर धीमी आँच पर पकावें । चाशनी आ जाने पर काँच की शीशी में भरकर रख लें इसको 10-10 मिलीलीटर रोज सुबह शाम गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से फेफड़ों को ताकत मिलती है और जलन वाली खाँसी और पित्त्जन्य मूर्छा में लाभ होता है ।
4 :- ईसबगोल की लस्सी :-
ईसबगोल की भूसी को 6 ग्राम लेकर सालममिश्री 2 ग्राम लेकर 50 ग्राम दूध में डालकर पकावें । जब पकते पकते गाढ़ी लस्सी जैसा बन जाये तो ठण्डा करके सेवन करें । यह रोज दो बार सेवन करें । इस लस्सी के 60 दिन लगातार सेवन करने से शुक्रमेह, वी*र्य का पतलापन, स्वपनदोष आदि पुरुष विकारों और स्त्रियों के प्रदर रोग में लाभ करती है ।
5 :- ईसबगोल की खीर :-
ईसबगोल 10 ग्राम को एक पावभर दूध में पककर खीर बना लें । स्वाद के लिये शक्कर मिला सकते हैं लेकिन कम मात्रा में । इस खीर का सेवन रोज एक बार करने से हड्डियॉ मजबूत बनती हैं और शरीर में सप्त धातुओं का पोषण होता है । इस खीर का सेवन 45-60 दिन तक किया जाना चाहिये ।
ईसबगोल के पाँच तरह के विशिष्ट योग जो इस लेख में दिये गये हैं, हमारी समझ में पूरी तरह से हानिरहित हैं । फिर भी आपके आयुर्वेदिक चिकित्सक के परामर्श के बाद ही हम आपको इन्हे प्रयोग करने की सलाह देते हैं । ध्यान रखें कि आपका चिकित्सक आपके शरीर और रोगों को सबसे बेहतर समझता है और उसकी सलाह का कोई विकल्प नही होता है ।
प्रकाशित आयुर्वेद क्लीनिक, मेरठ के सौजन्य से ईसबगोल के पाँच तरह के विशिष्ट योग से समबन्धित यह लेख आपको अच्छा और लाभकारी लगा हो तो कृपया लाईक और शेयर जरूर कीजियेगा । आपके एक शेयर से किसी जरूरतमंद तक सही जानकारी पहुँच सकती है और हमको भी आपके लिये और बेहतर लेख लिखने की प्रेरणा मिलती है । इस लेख से सम्बंधित आपके कुछ सुझाव हो तो कृपया हमको कमेण्ट करके जरूर बताइये । आपके सुझावों से हम अपने अगले लेख को आपके लिये और उपयोगी बना सकते हैं ।
प्रकाशित आयुर्वेद क्लीनिक, मेरठ के सौजन्य से ईसबगोल के पाँच तरह के विशिष्ट योग से समबन्धित यह लेख आपको अच्छा और लाभकारी लगा हो तो कृपया लाईक और शेयर जरूर कीजियेगा । आपके एक शेयर से किसी जरूरतमंद तक सही जानकारी पहुँच सकती है और हमको भी आपके लिये और बेहतर लेख लिखने की प्रेरणा मिलती है । इस लेख से सम्बंधित आपके कुछ सुझाव हो तो कृपया हमको कमेण्ट करके जरूर बताइये । आपके सुझावों से हम अपने अगले लेख को आपके लिये और उपयोगी बना सकते हैं ।
Comments
Post a Comment