परहेज करना क्यों जरूरी है, समझिये इसकी गहराई को
परहेज करना क्यों जरूरी है, समझिये इसकी गहराई को
परहेज करना क्यों जरूरी है, समझिये इसकी गहराई को

किसी भी चिकित्सा के साथ डॉक्टर आपसे परहेज करने का आग्रह करते हैं । बहुत से लोग करते हैं और बहुत से लोग नही करते हैं । इस लेख में एक जानकारी जो कि समाज के हित के लिये बहुत जरूरी है । चलिये जानते हैं ।
परहेज और आयुर्वेद :-
विश्व की सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद ने चिकित्सा से ज्यादा उचित पथ्य-अपथ्य के पालन को दिया है । पथ्य-अपथ्य अर्थात रोग अवस्था और स्वस्थ अवस्था में खाने पीने के परहेज का पालन करना । रोगी अवस्था में इसलिये कि रोग को जल्दी समाप्त किया जा सके और स्वस्थ अवस्था में इसलिये कि कि अपने स्वास्थय की रक्षा की जा सके । वास्तव में इन्द्र की सभा से ऋषि भारद्वाज द्वारा आयुर्वेद का ज्ञान पृथ्वी पर लाने के उद्देश्य भी यही दो थे कि स्वस्थ के स्वास्थय की रक्षा और रोगी के रोगों का निराकरण । किन्तु दुर्भाग्य की बात है कि अधिकतर लोग परहेज का पालन नही करते हैं और अपने स्वास्थय को खराब कर रोगों को बलशाली बनाते रहते हैं । कुछ लोग इसलिये पथ्य-अपथ्य का पालन नही करते कि उनको जानकारी नही होती है और कुछ इसलिये कि उनको अपनी आदतों पर नियन्त्रण नही है । शायद इसी का नतीजा है कि हर साल देश में हजारों नये चिकित्सक बढ़ने के बावजूद भी रोगियों कि सँख्या कम होने के बजाय और बढ़ती जा रही है ।
परहेज क्यों जरूरी है, एक बोध कथा :-
एक व्यक्ति को बहुत लम्बे समय से खाँसी का रोग था और वह धूम्रपान करने का बहुत शौकीन था । इसके अलावा खटाई खाना भी उसको बहुत पसन्द था । जिस किसी भी चिकित्सक के पास वह इलाज के लिये जाता था वह उसको परहेज करने को बोलता था लेकिन रोगी अपनी आदत से मजबूर, चिकित्सक को साफ बोल देता था कि आपकी दवा सही समय पर खाऊँगा लेकिन धुम्रपान और खटाई नही छोड़ सकता । इस तरह रोग ठीक नही हुआ और वह भटकता रहा । आखिर में किसी ने उसको एक बहुत प्रसिद्ध वैध जी का पता बताया । वो वैध जी के पास पहुँचा और बोला कि वैध जी मै अपना रोग आपको बताऊ उससे पहले आप ये जान लो कि मै धुम्रपान और खटाई नही छोड़ुँगा । वैध जी ने कहा अपना रोग तो बताओ, तब उस व्यक्ति ने अपना रोग कह सुनाया । वैध जी बोले ठीक है आप धुम्रपान और खटाई मत छोड़ना लेकिन मै जो आपको दवायें दे रहा हूँ उनका नियम पूर्वक सेवन करते रहना । रोगी सुन कर खुश हो गया कि वैध जी आप तो धन्य हैं, मुझे बताओ कि यह दवा मुझे किस तरह से लाभ करेगी जबकि आज तक कोई चिकित्सक मुझे दवा देने को भी तैयार नही होता था । वैध जी ने कहा कि यह दवा तुमको तीन तरह से लाभ करेगी, पहला लाभ तो यह कि आपके घर में कभी भी चोरी नही होगी, दूसरा लाभ यह कि आपको कभी कुत्ता नही काटेगा और तीसरा लाभ यह कि बुढ़ापा आपसे हमेशा दूर ही रहेगा अर्थात आप कभी बूढ़े नही होंगे । यह सुनकर वह व्यक्ति तो मानों दुनिया का सबसे प्रसन्न व्यक्ति बन गया और बोला कि यह तो बहुत बड़ी चमत्कारी दवा है, इसका क्या नाम है और यह इतने अच्छे प्रभाव कैसे देती है । वैध जी हस कर बोले दवा तो कुछ खास नही है बस हाजमे की गोली है । बस तुम परहेज नही करोगे तो तो खाँसी कभी अच्छी नही होगी और दिन रात खाँसते रहोगे जिससे तुम्हारे घर में कभी चोर नही घुसेगा । रोग से इतने कमजोर हो जाओगे कि बिना लाठी पकड़े चल ना सकोगे । जब लाठी लेकर चलोगे तो कुत्ता पास नही आयेगा । तीसरा बुढ़ापा आने से पहले ही मर जाओगे तो इसलिये कभी भी बूढ़े नही होंगे ।
परहेज क्यों जरूरी है, समझ गये होंगे ना :-
ये एक छोटी सी बोधकथा यह समझाने के लिये पर्याप्त है कि परहेज क्यों जरूरी हो जाता है । किसी भी रोग में यदि उचित पथ्य अपथ्य का पालन ना किया जाये तो वह रोग को बढ़ाकर गम्भीरता की स्थिति में पहुँचा देता है । इसलिये ध्यान रखना कि जब भी आपका डॉक्टर आपसे किसी परहेज के बारे में बोलता है तो ये आपका रोगीधर्म बन जाता है कि आप उसका कहा मानें और परहेज का पालन करें ।
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